राहुकाल हिन्दू ज्योतिष में दिन का एक ऐसा समय माना जाता है जब कोई भी नया शुभ कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है। यह समय विशेष रूप से ग्रह Rahu के प्रभाव से जुड़ा हुआ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु एक छाया ग्रह है जो भ्रम, बाधा और अचानक आने वाली समस्याओं का कारण बन सकता है।
इसलिए विवाह, यात्रा, व्यापार शुरू करना, नया काम, पूजा-पाठ या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत राहुकाल में नहीं करनी चाहिए।
राहुकाल का महत्व
वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर दिन लगभग 1 घंटा 30 मिनट का एक समय राहुकाल कहलाता है। यह समय सूर्य उदय से सूर्यास्त के बीच में आता है और हर दिन इसका समय अलग-अलग होता है।
राहुकाल के दौरान नया कार्य शुरू करने से कार्य में बाधा, देरी या असफलता की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को इस समय जारी रखा जा सकता है।
सप्ताह के अनुसार राहुकाल का समय
| दिन | राहुकाल का समय |
|---|
| सोमवार | सुबह 7:30 – 9:00 |
| मंगलवार | दोपहर 3:00 – 4:30 |
| बुधवार | दोपहर 12:00 – 1:30 |
| गुरुवार | दोपहर 1:30 – 3:00 |
| शुक्रवार | सुबह 10:30 – 12:00 |
| शनिवार | सुबह 9:00 – 10:30 |
राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए
नया व्यापार शुरू करना
विवाह या सगाई से जुड़े कार्य
घर से शुभ यात्रा की शुरुआत
नया घर या संपत्ति खरीदना
महत्वपूर्ण निर्णय लेना
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राहुकाल से बचने का उपाय
यदि किसी कारणवश राहुकाल में यात्रा या कार्य शुरू करना जरूरी हो, तो निम्न उपाय किए जा सकते हैं—
- भगवान Shiva का स्मरण करें
- “ॐ राहवे नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें
- घर से निकलते समय थोड़ा गुड़ खाएं
इन उपायों से राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। click kare
निष्कर्ष
राहुकाल वैदिक ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण समय है जिसे ध्यान में रखकर शुभ कार्य करने से जीवन में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले राहुकाल का समय अवश्य देखना चाहिए।
